उत्तरप्रदेश

गौतमबुद्धनगर दनकौर:कस्बा दनकौर में महोर्रम के जुलूस का आगाज  ऊंची दनकौर से ख़लीफा महरुम अब्दुल वहीद जी के या से होंगा।

हजरत इमाम हुसैन व उनके परिवार व साथियों की शहादत में मुसलमान मुहर्रम (शहादत हुसैन मातम )के रूप में गमगीन होकर मनाया जाता हैं*

हजरत इमाम हुसैन व उनके परिवार व साथियों की शहादत में मुसलमान मुहर्रम (शहादत हुसैन मातम )के रूप में गमगीन होकर मनाया जाता हैं

इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक मुहर्रम साल का पहला महीना है और इस महीने की 10 तारीख को आशूरा भी कहा जाता है.ये दिन योमे आशूरा के नाम से भी मशहूर है. यही वो दिन है जब ईराक के करबला में इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ शहादत दी थी. इस दिन को पूरी दुनिया में शिया-सुन्नी मुसलमान शाहदते हुसैन गमे जुलूस निकालते हैं और इमाम हुसैन का गम मनाते हैं।
कस्बा दनकौर में महोर्रम के जुलूस का आगाज  ऊंची दनकौर से ख़लीफा महरुम अब्दुल वहीद जी के या से होंगा। निची दनकौर के और ताजी दारो को साथ मिलाकर दनकौर कस्बे में मोहर्रम के जुलूस को निकाला जाएगा जुलूस का समापन रात्रि 8:00 बजे थाने के पास  आकर समापन किया जाएगा ऊंची दनकौर से बड़े ताजी दार, सलीम लंबरदार, शहीद कुरैशी,। बड़े ख़लीफा भोला भाई हाजी इस्लाम समशाद चौधरी फारूक चौधरी यासीन चौधरी जमाल भाई आदि व कस्बे से रहिस सैफी मुरसलीम फारुख सैफी समसाद सैफी सरफराज सैफी साहिद सैफी सलिमुद्दिन सैफी अय्यूब सैफी सहिद अल्वी रसीद कुरैशी आरिफ़ सैफी आदि व और सभी समाज के लोग मोजूद रहें।
निची दनकौर से मरहुम अब्दुल गफूर चूड़ी फरोश मेहंदी ताज दर थे। अब उन के भाई अब्दुल सकूर अब्दुल जहुर तथा उन के बेटे साबिर शाहिद आबिद ताहिर आदि उन का परिवार से  बेटे व भाई हज़रत हुसैन सहादत की रसम को अदा करते चले आ रहे।
और (बड़े ख़लीफा) निची दनकौर शहर से मरहुम डॉक्टर अब्दुल जब्बार हांजी अब्दुल गफ्फार अब्दुल सलाम राइन थे। अब ख़लीफा मीनू राइन ख़लीफा डॉक्टर रहमत अली  ख़लीफा मोहम्मद डब्बू ख़लीफा मोहम्मद इलियास ख़लीफा खलीफा रसूल बक्स अब्बासी सुफी आरीफ
आदि अपने बड़ों की रसमो को कई पीढ़ियां से मेहंदी ताज दारी की रसम को अदा करते आ रहे हैं।ओर आगे भी करते रहेंगे।

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